चौथमल प्रजापति की अनुठी पहल, समृद्ध कर रहे हाड़ौती की व्याकरण

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प्रजापति मंथन : कोटा (राज.) दुनियां में कई तरह की बोलियां व भाषाएं बोली जाती है लेकिन जो बात राजस्थानी भाषा व बोली की है वो ओर कहां, ऐसे में राजस्थान में बोली जाने वाली एक बोली है हाड़ौती जो कि पुरे राजस्थान में प्रसिद्ध है। इसी बोली को समृद्ध बनाने का काम कर रहे है चौथमल प्रजापति मार्तण्ड प्रजापति हाड़ौती की व्याकरण पर कार्य कर रहे है। उन्होने व्याकरण पर पुस्तक भी लिखी है।

पुस्तक के विभिन्न अध्यायों में भाषा के रूप व लिपि को समझाया है तो स्वर व व्यंजनों का जिक्र भी किया है। चौथमल प्रजापति बताते है कि हिन्दी में उच्चारण के आधार पर 52 वर्ण होते है। इनमें 11 स्वर और 41 व्यंजन है, जबकि हाड़ौती में 8 स्वर और 29 व्यंजन से काम चलता है। हाड़ौती भाषा को पहचान मिल सके, लोग इसके महत्व को समझ सकें इस उद्देश्य से हाड़ौती की व्याकरण पर कार्य किया है। आज हम घरो में भी अपनी भाषा का प्रयोग करने में संकोच करते है, यह चिंता का विषय है।