Saturday, February 4, 2023
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प्रजापति समाज छात्रावास जयपुर का इतिहास

स्वतंत्रता प्राप्ति के पश्चात देश में ग्रामीण विकास कार्य में हुए शिक्षा प्रसार के फलस्वरूप निर्धन एवं पिछड़े वर्ग के छात्र शिक्षा की प्राप्ति के उद्देश्य से शहरों की ओर आकृष्ट हुये है। महाविद्यालय स्तर की संस्थाओं में पर्याप्त आवासीय सुविधा का अभाव तथा ग्रामीण परिपेक्षय के प्रतिभावान छात्रों को उच्च शिक्षा की प्राप्ति में सहायक समुचित, स्वच्छ वातावरण प्रदान करने के उद्देश्य से जयपुर शहर में कुम्हार छात्रावास के निर्माण की आवश्यकता महसूस की गई। समाज के विभिन्न वर्गो, संस्थाओं एवं संगठनों द्वारा समय-समय पर अपने विभिन्न कार्यक्रमों, सम्मेलनों एवं विचार गोष्ठियों में यह माँग उठाई गई कि राज्य सरकार से कुम्हार छात्रावास के लिए भूमि आवंटित करने का अनुरोध किया जावे।

वर्ष १९८९ में महावीर स्कूल जयपुर में कुम्हार समाज का भव्य प्रान्तीय सम्मेलन आयोजित किया गया। जिसमें प्रस्ताव पारित कर जयपुर विकास प्राधिकरण में चार हजार वर्गगज जमीन छात्रावास हेतु आवंटित करवाने का निर्णय लिया गया। इस प्रस्ताव की परिपालना में जे.डी.ए. में प्रार्थना पत्र प्रस्तुत कर मांग की गई कि अन्य समाजों के संगठनों की तरह अखिल भारतीय प्रजापति (कुम्भकार) महासंघ को भी जयपुर शहर में भूमि आवंटित की जावें।

श्री केदारमल खटोड़ (होटल शेखावाटी, जयपुर), श्री पांचूराम वर्मा, श्री भैरूलाल पूर्व प्रधान, श्री कालूराम घोड़ेला जोधपुर, श्री पी.डी. दहमीवाल आदि सामाजिक कार्यकर्ताओं द्वारा भरसक प्रयास करते हुए श्री सुरेन्द्र जी गोयल (विधायक जैतारण) के विशेष प्रयत्नों से जे.डी.ए. ने स्वायत शासन विभाग राजस्थान सरकार को अनापत्ति प्रमाण पत्र (एन.ओ.सी.) जारी करने की अनुशंषा की। परन्तु 16 वर्षो तक काफी प्रयास एवं भागदौड़ के उपरान्त भी परिणाम शुन्य रहा।

वर्ष 2007 में सुरेन्द्र जी गोयल का राज्य मंत्रीमण्डल में प्रतिनिधित्व देकर नगरीय विकास एवं स्वायत्त शासन विभाग का राज्यमंत्री (स्वतंत्र प्रभार) बनाया गया। राजस्थान सरकार के इस निर्णय से समाज के लोगों को आशा की किरण दिखाई दी। समाज के प्रबुद्ध लोगों ने श्री सुरेन्द्र जी गोयल के निर्देशानुसार अनापत्ति पत्र के आधार पर नये सिरे से छात्रावास हेतु भूमि आवंटित कराने का प्रार्थना पत्र दिया।

श्री गोयल साहब ने यह भी निर्देश दिये कि समय बहुत कम है, शीघ्र ही राज्य में आचार संहिता लगाकर राजस्थान विधानसभा के चुनाव होने वाले है। यदि निरन्तर प्रयास जारी रखा जावेगा तो परिणाम सार्थक हो सकते है। इस पर श्री केदारमल खटोड़, पांचूराम जी वर्मा, आर.पी. वर्मा जी एवं शंकरलाल जी दादरवाल ने जे.डी.ए. के अधिकारियों से निरंतर माह तक संपर्क कर दर्जन भर भूखण्डों को देखा एवं जे.डी.ए. की आवासीय कॉलोनी महल योजना, जगतपुरा में भूखण्ड का चयन किया। इस भूखण्ड के दक्षिण में 200 फीट, पूर्व में 60 फीट, उत्तर में 40 फीट सडक़ है। जगतपुरा क्षेत्र में विभिन्न इन्जिनियरिंग कॉलेज, मेडिकल कॉलेज, विश्वविद्यालय एवं काफी शिक्षण संस्थान है।

श्री सुरेन्द्र जी गोयल सा. के निर्देशानुसार जे.डी.ए. ने प्रस्ताव पारित कर शैक्षणिक संस्थान एवं छात्रावास हेतु चार हजार वर्गगज भूमि डी.एल.सी. रेट के आधार पर एक करोड़ बयालीस लाख रू. कीमत थी आवंटि कर दी। जिसकी उस समय बाजार कीमत लगभग 8 करोड़ थी। जे.डी.ए. ने यह भी निर्देश दिये कि उपरोक्त डी.एल.सी. रेट की 10 प्रतिशत राशि सप्ताह में जमा करवा दी जावे। स्वयं गोयल साहब ने 2 लाख 11 हजार रू. अपनी तरफ से सहयोग देकर समाज के भामाशाहों से राशि एकत्र करने के निर्देश दिये। समाज के भामाशाहों से तुरन्त एक-एक लाख रू. एकत्र कर 120400 रू. भूमि की कीमत २४०९०० एकमुश्त शहरी जमाबंदी, १०१२५० रू. स्टाम्प तथा १२८५० रू. रजिस्ट्री शुल्क कुल रमक १५५९००० जेडीए में जमा करवाकर भूखण्ड पर कब्जा प्राप्त किया। बाद में डी.एल.सी. रेट १० प्रतिशत मूल्य पर ही राज्य सरकार से भूमि आवंटन करवाकर श्री गोयल साहब ने एक नया उदाहरण पेश किया।

दिनांक ११ अक्टूबर २००८ को सर्व कुम्हार छात्रावास का भूमि पूजन एवं शिलान्यास श्री सुरेन्द्र जी गोयल के कर कमलों द्वारा श्री मूलचंद जी कारगवाल बीदासर हाल उमरगांव बम्बई की अध्यक्षता में संपन्न हुआ। जिसमें एक लाख रू. एवं अधिक राशि प्रदान करने वाले भामाशाहों को सम्मान किया गया। इसी कार्यक्रम में श्री मूलचंद जी कारगवाल ने ५१ लाख रू. देने की घोषणा कर प्रारम्भिक तौर पर10 लाख रू. का सहयोग प्रदान कर निर्माण कार्य का शुभारम्भ करवाया। इसके बाद वर्ष २००९ की बसंत पंचमी से छात्रावास निर्माण कार्य विधिवत प्रारम्भ किया गया। जे.डी.ए. ने छात्रावास निर्माण के लिए चार मंजिल का नक्शा पास किया परन्तु समाज के प्रतिष्ठित व्यक्तियों की राय एवं आगे आने वाली पीढी की आवश्यकताओं को मध्यनजर रखते हुए आठ मंजिल की नींव डाली गई। समय का चक्कर रहा, समाज के भामाशाह जुड़ते गये और आज यह दो मंजिला भवन जिसमें 54 कमरे, डायनिंग हाल, मीटिंग हॉल समाज के छात्रों के लिए समर्पित है।

छात्रावास के लिए भूमि आवंटन से लेकर निर्माण तक 7 वर्षो में श्री केदारमल खटोड़ (होटल शेखावटी) एवं उनके सहयोगी सर्व श्री पाँचूराम जी वर्मा, श्री आर.पी. वर्मा, श्री शंकरलाल दादरवाल एवं श्री भानसिंह दादरवाल, श्री ओमप्रकाश किरोड़ीवाल का उल्लेखनीय योगदान रहा। जिन्होंने अपना अमूल्य समय प्रदान कर इस दो करोड़ की लागत के भवन का निर्माण करवाकर समाज को समर्पित किया। भवन निर्माण एवं भामाशाहों से संपर्क करने में श्री कारगवाल एवं श्री सुरेन्द्र जी गोयल निरन्तर छात्रावास में उपस्थित होकर मीटिंग कर मार्गदर्शन देते रहे। जिसके लिए समाज इन दोनों महान विभूतियों का सदैव ऋणी रहेगा। इसका लोकार्पण दिनांक ०६ जून २०१५ को पंचायत राज मंत्री सुरेन्द्र गोयल एवं श्री मूलचन्द जी कारगवाल द्वारा पूरे राजस्थान सर्व कुम्हार महासभा के तत्वाधान में लगभग ७५ हजार समाज बंधुओं की उपस्थिति में हुआ।

छात्रावास उद्घाटन कार्यक्रम को यादगार व सफल बनाने के लिये चुरू के चन्द्राराम गुरी, बीकानेर से चम्पालाल गेदर, गंगानगर के प्रहलाद टांक, कोटा के नन्दलाल प्रजापति, पूर्व पार्षद जयपुर के गंगाराम जाजपुरा, मोहन लाल पूर्व मैनेजर, पप्पू प्रजापति, जोधपुर से भंवरलाल पोटर आदि का विशेष योगदान रहा। वर्तमान में राजस्थान अखिल भारतीय प्रजापति कुंभकार महासंघ सर्व कुम्हार महासभा जयपुर प्रदेश अध्यक्ष श्री सुरेन्द्र गोयल के नेतृत्व में सभी जिलों में समाज को संगठित करने में सक्रिय है। एवं राजस्थान में स्थानीय स्तर पर अपने स्तर पर समाज का संगठन मजबूत बनाने का प्रयास कर रहें है।

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