सोशल मीडिया के ग्रुपों में शादी के लिए बायोडाटा भेजने की सोच रहें है तो रूकिए कहीं गलती तो नहीं कर रहें है आप?

व्हाटसएप्प के ग्रुपों में चल रहे बायोडाटा चिंता का विषय है, सावधानी की है जरूरत

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प्रजापति मंथन : झालावाड़। वर्तमान में व्हाटसएप्प ग्रुप में विवाह योग्य युवक-युवतियों के बायोडाटा भेजने का चलन चल रहा है। शादी ब्याह के नाम से कई ग्रुप बने हुए है। जहां बायोडाटा शेयर किया जाता है। शायद यह सभी को सबसे आसान भी लगता है। क्योंकि अधिकांश लोग पहले से ही व्हाटसएप्प, टेलीग्राम का इस्तेमाल कर रहें है। 

लेकिन आज में आप सभी को आगाह कर रहा हूँ कि इस प्रकार के ग्रुपों में अपने बच्चों के फोटो और बायोडाटा भेजने से बचे। आवश्यक होने पर ही किसी ग्रुप में भेजे। हां, आप पर्सनल किसी को भेज सकते है। उसमें कोई खतरा नहीं है। लेकिन ग्रुपों को लेकर हमें सावधानी बरतने की आवश्यकता है।

यहाँ मैं जो आपको कहने जा रहा हूँ वह कोई सुनी सुनाई बात या किसी दुसरे की बात नहीं है बल्कि मैने स्वयं इसको देखा है। आपके द्वारा सोशल मीडिया के इन ग्रुपों में भेजे गये बायोडाटा का कई लोग गलत इस्तेमाल कर रहें है। वे इन ग्रुपों से फोटो और बायोडाटा उठाते है तथा लोगों को ठगने में इस्तेमाल करते है। ये शातिर लोग ठगी के नित नये तरीक आजमाकर लोगों से पैसे ऐंठते है।

अगर आपने किसी ग्रुप में बायोडाटा भेजा है तो आपने भी देखा होगा कि आपके पास कई ऐसे अनजाने लोगों के फोन आने लग जाते है जो स्वयं को समाज की संस्था का सदस्य बता कर रिश्ते करने की बात करते है। अगर लड़के से बात करते है तो उसे आठ से दस लड़कियों के फोटो भेज देते है तथा कहते है कि इस लड़की ने आपकी प्रोफाइल पसंद की है। वह आपसे शादी करने के लिए तैयार है। लेकिन उसके लिए आपको हमारा सदस्य बनना होगा। और उस सदस्यता के नाम पर वे लोग समाज के लोगों से 5 से 10 हजार तक अपने खातें में डलवा लेतें है उसके बाद फोन बंद कर लेते है। यह कोई एक केस नहीं है, ऐसा कई लोगों के साथ हो चुका है।

चुंकि मै स्वयं एक वैवाहिकी परिचय पुस्तिका का प्रकाशन करता हूँ तथा ऑनलाईन वैवाहिक पोर्टल मैनेज करता हूँ। इस लिए जब लोग हमारे संपर्क में आते है तो वे अपनी पीढ़ा हमें बताते है कि फलां संस्था ने हमारे साथ ऐसा किया। उसके बाद वे उन लोगों पर विश्वास करने से भी कतराते है जो इन क्षेत्रों में पुरी इमानदारी से कार्य कर रहें है।

इनका एक और उदाहरण में आपको बताता हूँ कि जब हमने 2018 में परिचय पुस्तिका का प्रकाशन किया तो उसका डिजिटल संस्करण बनाकर हमारी वेबसाईट पर अपलोड कर दिया। उसके लगभग 15 दिन बाद ही एक सदस्य का फोन आया जिसकी लड़की का आयोडाटा पुस्तिका में प्रकाशित हुआ था कि भाईसाहब एक नंबर से फोन आ रहा है और वे आपका नाम लेकर 5000 रूपये मांग रहा है। क्या आपकी संस्था में और भी लोग है क्या? इस पर मैने उससे नंबर लेकर बात की तो वह व्यक्ति गोलमोल जवाब देने लगा। जब मैने सख्ति के साथ पूछताछ जारी रखी तो वह बत्ततमीजी पर उतर आया और फोन काट दिया। उसके बाद उस नंबर पर फोन ही नहीं लगा।

उसके बाद हमने पत्रिका का डिजिटल संस्करण उपलब्घ करवाना बंद कर दिया है। उसके बाद हमने ऑनलाईन वैवाहिकी पोर्टल ही बनवा लिया। ताकि सभी रजिस्टर्ड यूजर का डाटा सेफ रहे। बिना रजिस्ट्रेशन के कोई भी व्यक्ति इस पोर्टल को उपयोग नहीं कर सकता तथा बिना पैमेंट किये यूजर की जानकारी ओपन नहीं होती। हालांकि पैमेंट के लिए राशि न्यूनतम रखी गई है। लेकिन राशि की बाध्यता होने से फर्जी लोगों की पहुंच नहीं हो पाती है।

इसलिए सभी को इसके दुष्परिणाम को समझना होगा। अगर कोई शादी ब्याह के नाम से इस प्रकार पैसों की लेनदेन करता है तो उसकी सूचना पुलिस तक दें। क्योंकि ऐसे लोगों पर नकेल लगना आवश्यक है।

प्रहलाद कुमार प्रजापति

संपादक प्रजापति मंथन, झालावाड़