शुरू हो चूका है भारत में, आतमनिर्भरता का दौर – कवि सोनू सुरीला

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गीत –“शुरू हो चूका है भारत में आतमनिर्भरता का दौर” छंद -आल्हा मात्राभार 16-15

शुरू हो चूका है भारत में , आतमनिर्भरता का दौर ।
चले कदम से कदम मिलाके ,सभी देशवासी इस और ।।

सोन चिरैया बनना फिर से, बने विश्व गुरु भारत देश ।
बहे स्वदेशी की धारा तो, रामराज्य सा हो परिवेश ।
रोजगार का सृजन बढ़ेगा , बढ़ जायेगा कारोबार ।
मजबूत होगी अर्थव्यवस्था, फेलेगा जग में व्यापार ।
इक्कीसवी सदी का हमको,बनना दुनियां में सिरमोर ।
शुरू हो चूका है भारत में ,आतमनिर्भरता का दौर ।
चले कदम से कदम मिलाके,सभी देशवासी इस और ।।

स्वदेशी खान -पान रखे हम,हो स्वदेशी ही रहन -सहन ।
और विदेशी सामानों का, करना होगा हमको दहन ।

सस्ती और सुलभ हो चीजे ,उद्योगों की हो भरमार ।
आत्म निर्भरता का हमारा ,होगा सपना तब साकार ।
राष्ट्र चेतना महायज्ञ का, करे समर्थन हम पुरजोर ।
शुरू हो चूका है भारत में ,आतमनिर्भरता का दौर ।
चले कदम से कदम मिलाके ,सभी देशवासी इस और ।।

दिखलाई स्वदेशी ताकत ,कृतव्यनिष्ठा व जज्बात ।
दवा बनाई है कोरोनिल ,कोरोना को देने मात ।
और हटाए एप्प विदेशी, कर ना पाए कोई घात ।
विकास धारा यहाँ बहाने ,सौपा जिम्मा है हर हाथ ।
अपना अपना फर्ज निभाए,थामके हम स्वदेशी डोर ।
शुरू हो चूका है भारत में, आतमनिर्भरता का दौर ।
चले कदम से कदम मिलाके ,सभी देशवासी इस और ।

सोनू” सुरीला” बारां