साईकिल रिम भवई नृत्य कलाकार बनय सिंह प्रजापत – एक परिचय

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कला के जरिए अपनी पहचान तो बहुत लोगों ने बनाई है। लेकिन कला में कौतुहल पैदा करने वाले लोग बहत कम होते है। साईकिल की नौ रिम के साथ भवाई नृत्य करना, सिर पर गिलास रखकर उस पर रिम रखकर उसमें भी आल जलाकर भ्वाई करना संतुलन के साथ ही संभव हो सकता है। इस फोक डांस के जरिए दर्शकों को आश्चर्यचकित कर देने वाले डांसर बनय सिंह ने करीबन 43 देशों में अपनी कला का प्रदर्शन किया है।

प्रजापति मंथन : अलवर / राज. जिले का एक युवा बनय सिंह प्रजापत ने साईकिल रिम भवई नृत्य से देश में ही नही विदेश में भी अपनी पहचान बनाई है। इस कलाकार ने राजस्थान लोक गीतों पर साईकिल रिम भवई नृत्य प्रस्तुत कर करीब 35 देशो में हजारों दर्शकों को तालियां बजाने पर मजबूर कर चुके है।

बनय सिंह प्रजापत का जीवन परिचय

बनयसिंह प्रजापति का जन्म अलवर जिले की कठूमर तहसील के भनोखर गांव में 25 अगस्त 1979 को हुआ। आपने अल्प आयु में ही नृत्य कला में अपनी अलग पहचान बनाई है। आपके पिता गिर्राज प्रसाद और माता गुलबाई ने आपको सदैव कला के क्षेत्र में जाने के लिए प्रेरित किया। बनयसिंह प्रजापत अपनी कला कौशल के लिए संदीप सैनी को अपना गुरू मानते है। नृत्य कला में बनेसिंह राजस्थानी रिम भवाई, मटका भवाई, चक्का भवाई, अग्नि भवाई एवं राजस्थानी नृत्य में सिद्धहस्त है।

अन्तर्राष्ट्रीय स्तर पर दे चुके है प्रस्तुती

बनय सिंह अन्तर्राष्ट्रीय स्तर पर साउथ अमेरिका, टोरंटो, लंदन, पैरिस, स्पेन, स्वीटजरलैण्ड, फिनलैण्ड, नोर्वे, इंग्लैण्ड, जापान, कनाड़ा, रूस, मोस्को, टोकियो सहित 50 से अधिक शहरों में अपनी प्रस्तुति से देश की कला व संस्कृति का मान बढ़ा चुके है। अपने नृत्य की मनमोहक अदाओं से आप हजारों दर्शकों को मंत्रमुग्ध कर देते है। एक साथ साइकिल की पांच रिमों को चलाकर कांच के चार गिलास ओर उनके ऊपर पानी का मटका रखकर और मुंह से अग्नि निकालना इनकी कलाओं में शामिल है। इन्होंने 2000 में कला महाविद्यालय से स्नातक किया। इन्होंने पढ़ाई के दौरान डांस सीखा जो इनका पेशा बन गया।

रिम भवाई नृत्य की प्रस्तुती देते कलाकार बनय सिंह प्रजापत।
रिम भवाई नृत्य की प्रस्तुती देते कलाकार बनय सिंह प्रजापत।

नृत्य कला में ऐसे बढ़ा रूझान

सन 1999 में बनय सिंह ने अपना डांस प्रोग्राम देना शुरू किया। नृत्य के दौरान ये कबाड़ी की दुकान से एक पुरानी रिम लेकर आए और हास्टल में प्रेक्टिस करने लगे। देखते ही देखते वे रिम की संख्या बढ़ाते चले गए और उन्हें पैर व सिर पर रखकर नृत्य करने लगे। जिला प्रशासन इन्हें दो बार जिला स्तर पर सम्मानित कर चुका है। बनय सिंह का कहना हे कि भारतीय पुरातन संस्कृति को बचाए रखने के लिए नृत्य कला को भी बचाकर रखना होगा।

इनके साथ भी कर चुके है काम

देश के उस्ताद जाकिर हुसैन, ए.आर. रहमान, जसवीर सिंह जस्सी, हरिहरन, मधु श्री, ईस्माईल दरबार, बॉबी देओल, उस्ताद सुल्तान खॉ, कैलाश खैर, साधना सरगम, सुखवेन्द्रर सिंह, शिवामणी जैसे सुप्रसिद्ध कलाकारों के साथ बनेसिंह प्रजापत काम कर चुके है। डांस के साथ बनयसिंह ने अलवर और जयपुर में अभिनय भी किया है जिसमें ”देश के लिए, ”मैं इंसान हूँ, ”हकीकत आदि नाटक चर्चित रहे।

2001 में स्वतंत्रता दिवस पर लक्ष्मणगढ में उपजिला कलेक्टर ने सम्मानित किया। जिला कलेक्टर तन्मय कुमार ने, किसान महोत्सव मुंडावर में उपजिला कलेक्टर और विधायक धर्मपाल चौधरी ने, भरतपुर महाराजा विश्वेन्द्र सिंह व भूतपूर्व पर्यटन मंत्री बीना काक ने भी आपको सम्मानित किया है।

72वें स्वतंत्रता दिवस पर मुख्यमंत्री से हुए सम्मानित

मुख्यमंत्री श्रीमती वसुंधरा राजे से सम्मान प्राप्त करते बने सिंह प्रजापत।

प्रजापति मंथन : जयपुर / राज. अन्तर्राष्ट्रीय लोक कलाकार बने सिंह प्रजापति को 72वें स्वतंत्रता दिवस पर आयोजित प्रदेश स्तरीय कार्यक्रम में मुख्यमंत्री श्रीमती वसुंधरा राजे के द्वारा प्रशस्ति पत्र देकर सम्मानित किया गया। लोक कलाकार बनेसिंह अपने भवाई लोक नृत्य और रिम भवाई नृत्य के कारण विदेशों में भी अपनी प्रतिभा का जलवा दिखा चुके है। प्रजापति मंथन के द्वारा लोक कलाकार बनेसिंह के संघर्षो की कहानी 16 मई 2018 के अंक में ही प्रकाशित कर चुका है।

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