सब्र कर प्यारे … ये दिन भी गुजर जाऐंगे – पार्ट प्रथम

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सब्र कर प्यारे ... ये दिन भी गुजर जाऐंगे
सब्र कर प्यारे ... ये दिन भी गुजर जाऐंगे

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यह समय सरकार को कोसने का नहीे, सरकार को सहयोग करने का है। भारत में 30 जनवरी को कोरोना कोविड 19 का पहला मरीज सामने आया था। ऐसा लगता है कि इस वायरस की पहली आहट के साथ ही सरकार ने रोकथाम के लिए प्रभावी कदम उठा लिए इसी कारण आज भारत में संक्रमण नियंत्रित है। और ये प्रशासन का दायित्व भी है। लेकिन आम जनमानस में कोरोना संक्रमण का खतरा सरकार के जनता कफर्यु एवं लाकडाउन जैसे निर्णय के बाद संज्ञान में आया। आज के युग को भले ही संचार क्रांति का युग माना जाता है।

लेकिन देहाती क्षैत्रों में आज भी संचार के इन सशक्त साधनों के बावजुद अपने रोजमर्रा के कार्य मंे व्यस्त मजदुर वर्ग के परिवार एवं किसान परिवार ऐसी सकल मानव जाति के विनाश के लिए एक पैर पर खडी कोरोना जैसी महामारी के आतंक को समाचार चैनलों एवं समाचार पत्र में समाचार देखने पढने के बाद भी स्वविवेक से सावधानी बरतने के लिए या तोे अज्ञाानतावश या जान बुझकर कोई भी तैयार नहीं होता है। लेकिन राजा को तो हर परिस्थिति में अपनी प्रजा का ध्यान रखना ही है।

कोरोना की भनक लगते ही सरकार ने उठाये कदम

सरकार को कोरोना के तेजी से फैलते संक्रमण की भनक लगते ही केन्द्र की मोदी सरकार द्वारा निर्णायक कदम उठाते हुए,प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी द्वारा 24 मार्च को राष्ट्र के नाम संबोधन में कोरोना के सम्ंबंध में जानकारी देने के साथ ही सम्पुर्ण देश में 21 दिन के लिए लाकडाउन घोषित किया गया। और वही से शुरू होती है कोरोना के खिलाफ एक जंग….जिसमें देश के एक एक नागरिक को बचाने के लिए शासन प्रशासन को पुरा अमला लगा हुआ है। और मैं तो कहता हुं कि जीवन रक्षक बन कर काम कर रहै सेवको पर या कोरोना की रोकथाम के लिए किए जा रहै प्रयासों पर किसी भी तरह से प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से नकारात्मक टिप्पणी करने की बजाय सकारात्मक सुझाव देने की आवश्यकता है।

जिस प्रकार हमारे घर में किसी भी प्रकार से विपरीत परिस्थ्तिि बनने पर हम स्वविवेक से समस्या का उचित हल निकाल कर किसी को भी दोषी ठहराने का काम नहीं करते है। ठीक वही व्यवहार आज अपनाने की आवश्यकता है। कोरोना जैसी महामारी से निपटने के लिए घर पर रहना ही सबसे बडा हथियार है।

लाकडाउन के बाद डेलीवेजेस के मजदुरो के लिए तथा अपने गृहग्राम को छोडकर अन्यत्र काम कर अपना जिविकोपार्जन कर रहे लोगों के लिये काम धंधे बंद होने के कारण तत्काल अपने गांव या शहर की ओर रवानगी डालना पडी साथ ही स्थानीय मजदुर वर्ग के परिवार के पास एडवांस राशन न होने के कारण बडी मुसीबत का सामना तो करना पडा,लेकिन लाकडाउन कर इससे भी भयावह कोरोना के संक्रमण की बडी मुसीबत को काफी हद तक नियंत्रित किया जा चुका है। साथ ही आगे भी हम ईश्वर से सुखद समाचार की कामना करते है। लेकिन इस आलेख में मंै पुर्व में ही आम जन के सकारात्मक सहयोग की अपेक्षा कर चुका हुं। ऐसे में हमे चाहिए कि लाकडाउन के दौरान अतिआवश्यक कार्य होने पर ही घरों से बाहर निकले। साथ ही मास्क का उपयोग,स्वास्थ विभाग के दिशा निर्देशों का पालन,सोश्यल डिस्टेंसिंग जैसे महत्वपुर्ण बिंदुओं का भी ध्यान रखना होगा।

जीवन प्रजापति बिछडौद जि-उज्जैन मप्रमो. 96 69 218951