मुकुंदरा की पर्वतमालाओं के मध्य मशालपुरा में स्थित है प्रजापति समाज का प्राचीन मंदिर

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प्रजापति मंथन : सूकेत / कोटा
अरावली की पहाडिय़ों के मुकुन्दरा हिल दरा अभ्यारण के मशालपुरा गांव में प्रजापति समाज का प्राचीन श्री ठाकुर जी महाराज का मंदिर स्थित है। प्राचीन समय से ही यह मंदिर प्रजापति समाज का आस्था का केन्द्र रहा है जो तक भी बना हुआ है। आज भी धार्मिक कार्यक्रमों के आयोजनों पर मंदिर के नाम की राशि निकाली जाती है। अर्थात इस मंदिर के क्षेत्र के गाँवों में रहने वाले किसी प्रजापति परिवार के घर पर शादी विवाह जैसे आयोजन होते है तो मंदिर का नेक (राशि) निकाली जाती है जो यहाँ के विकास कार्यो पर खर्च होती है।

मंदिर अध्यक्ष देवीचंद प्रजापति ने बताया कि इस मंदिर का निर्माण लगभग 200 वर्षो पूर्व प्रजापति समाज के चार भाइयों ने मिलकर किया था। मशालपुरा गांव जगंल में होने के कारण डाकूओं और चोरों का आंतक रहता था। जिनसे परेशान होकर कई लोग यहाँ से पलायन कर चले गए। इसी दौरान प्रजापति परिवार के लोगों ने भी यहाँ से जाने का निश्चय किया। लेकिन उनके मन में यहाँ से जाने से पहले यहाँ एक निशानी बनाने का विचार आया। इस पर उन्होंने यहाँ पर श्री ठाकुरजी महाराज के मंदिर का निर्माण करवाया। तथा इसे प्रजापति समाज के क्षेत्र के लोगों को सौंप कर चले गए। इन परिवारों के वंशज आज भी निकटवर्ती गांवों में रहते है।

कोटा जिले के कनवास तहसील के ग्राम झालरा में रहने वाले रामगोपाल पिता रामनाथ प्रजापति ने बताया कि हमारे दादा जी श्री बाला जी व उनके भाइयों का परिवार 200 वर्ष पूर्व ग्राम मशालपुरा में रहता था। परिवार आर्थिक रूप से सक्षम थे। इसलिए तीन बार डाकुओं ने हमारे परिवार को लूठा। ठाकुओं से परेशान होकर परिवारों गांव छोडऩे का निश्चय किया। लेकिन गांव छोडऩे से पूर्व उन्होंने उस स्थान पर मंदिर का निर्माण कर दिया। जो आज भी श्री ठाकुर जी महाराज के मंदिर के नाम से जाना जाता है।

हमारे चारो भाइयों में देवलाल जी, श्याम लाल जी का परिवार कनवास में, प्रभूलाल जी, लक्ष्मण जी, प्रताप जी का परिवार दोबड़ा में तथा एक भाई का परिवार मूण्डला में बसा। बाद में भटवाड़ा, पिपल्दा, खेड़ली, मोड़क और कनवास क्षेत्र के लोगों ने सहयोग करके मंदिर की व्यवस्था संभाली। जो निरंतर चली आ रही है। वर्तमान में लगभव 20 वर्षो से मंदिर समिति सुकेत यहाँ की व्यवस्था संभाल रही है। समिति ने समाज के लोगों से सहयोग एकत्रित कर यहाँ पर जाली, टीनशेड व मरम्मद का कार्य भी करवाया है। मंदिर समिति का बैंक में खाता है तथा आय-व्यय का पूरा विवरण रखा जाता है।

डोलग्यारस पर प्रतिवर्ष निकाले जाते है देवविमान

मशालपुरा मंदिर पर प्रतिवर्ष डोल ग्यारस के अवसर पर देवविमान निकाले जाते है। जिसमें निकटवर्ती क्षेत्र के लोग भी शामिल होते है। इस वर्ष भी कोरोना महामारी के चलते सोशल डिस्टेेंसिंग का ध्यान रखते हुए देवविमान निकाले गए। मंदिर समिति की कार्यकारिणी में अध्यक्ष देवीचन्द प्रजापति, संरक्षक राजेन्द्र कटारिया धूलेट, बद्रीलाल प्रजापति खेड़ली, गोकुल प्रजापति गरनावद, जुगल प्रजापति देवली, उपाध्यक्ष परमानन्द नालोदी, गुलाबचंद पिपल्दा, कोषाध्यक्ष सुखदेव प्रजापति, सचिव मुकेश प्रजापति पिपल्दा, सहसचिव लालचंद प्रजापति खेड़ली आदि शामिल है।