मेघ धरा प बरस क, प्यासां प्यास बझाय।

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मेघ धरा प बरस क,
प्यासां प्यास बझाय।
ओढ़ ओढणी अमकतां,
फूली नहीं समाय।।

बीज धरा नगळै नहीं,
राखै सदां दबार ।
पड़्यां असाडू डूमड़ा,
धांसां देख अपार ।।

चौथमल प्रजापति
८२७८६१२५२५