गीत- “कृष्ण तुझे आना होगा”

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देवधरा पे पाप बढ़ा है, कृष्ण तुझे आना होगा।
भयावरण फैला कंसो का, सुदर्शन चलाना होगा।।

नाग विषैले डोल रहे है, जहरीली फुँफकार लिए ।
पहन रखे है छदम मुखोटे, दिल में शूल कटार लिए ।
प्रेम आवरण लील रही है, जहाँ द्वेषता की बदली ।
छलियाओं ने जाल बिछाया, षड्यंत्रों का गली -गली ।
सत कर रहा घोर क्रंदन, असत को मिटाना होगा ।
देवधरा पे पाप बढ़ा है, कृष्ण तुझे आना होगा ।
भयावरण फैला कंसो का, सुदर्शन चलाना होगा ।।

रिश्तों की बुनियाद खोखली, स्वार्थभाव पर टिकी हुई ।
पाश्चात्य का घोर अँधेरा, नैतिकता है बिकी हुई ।
छोटी – छोटी मासूमों पर,जुल्म ढहाए जाते है ।
हुए काम में अंधे हवसी, नोच – नोच कर खाते है ।
माँ – बहना का बन के रक्षक, सम्मान दिलाना होगा ।
देवधरा पे पाप बढ़ा है, कृष्ण तुझे आना होगा ।
भयावरण फैला कंसो का, सुदर्शन चलाना होगा।।

गय्या दर -दर ठोकर खाती, कोई नहीं है रखवाला ।
अमृत का जो पान कराती, नसीब न उनको निवाला ।
भूखी प्यासी क्रंदन करती, दया नही क्यों आती है ।
कसाइयों के दंश झेलती, भूचडख़ाने जाती है ।
बनके फिर से ग्वाला कान्हा ,गो मात चराना होगा ।
देवधरा पे पाप बढ़ा है, कृष्ण तुझे आना होगा ।
भयावरण फैला कंसो का, सुदर्शन चलाना होगा।।

सोनू “सुरीला” Baran
28/06/2020