ज़माने से अलग रस्ता हमारा

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ज़माने से अलग रस्ता हमारा

ग़ज़ल

सभी से दोस्ती दावा हमारा
ज़माने से अलग रस्ता हमारा

भरी दुनिया में तन्हा फिर रहे हैं
कोई तो हमसफ़र होता हमारा

कभी वो कर के वादा फिर न आएं
इसी उलझन में दिल उलझा हमारा

ख़ुशी तो दो घड़ी ही पास ठहरी
रहा ग़म से मगर रिश्ता हमारा

हमें कुछ हारने का ग़म नहीं पर
सभी ने दाँव क्यों खेला हमारा

लेखक परिचय :-

बलजीत सिंह बेनाम (संगीत अध्यापक)
सम्पर्क सूत्र: 103/19 पुरानी कचहरी कॉलोनी, हाँसी
मोबाईल नंबर : 9996266210