गंगा जल में है जड़ी-बूटियों का स्पर्श, रोगाणुओं को मारने की अद्भुत क्षमता

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राष्ट्रीय जल विज्ञान संस्थान रुड़की के निदेशक रहे डॉ. आरडी सिंह का कहना भी यही है कि हरिद्वार में गोमुख गंगोत्री से आ रही गंगा के जल की गुणवत्ता पर इसलिए कोई दुष्प्रभाव नहीं पड़ता, क्योंकि यह अनेकों जीवन दायिनी उपयोगी जड़ी-बूटियों के ऊपर से स्पर्श करता हुआ आता है। पानी में आई इस बैक्टीरिया रोधी अद्भुत क्षमता को लेकर सभी का एक स्वर में मानना है कि गंगा के पानी में रोगाणुओं को मारने की यह अद्भुत क्षमता गंगोत्री और हिमालय से आती है। गंगा जब हिमालय से आती है तो कई तरह की मिट्टी, कई तरह के खनिज, कई तरह की जड़ी बूटियों से मिलती मिलाती है, जिसके परिणाम से कुछ ऐसा मिश्रण बनता है, जो जीवन के लिए शक्ति देने वाला बन जाता है।

गंगा के जल में है शक्तिशाली बैट्रिया फोस नामक बैक्टीरिया

वरिष्ठ वैज्ञानिक डॉ. मुकेश कुमार शर्मा भी गंगा जल खराब नहीं होने के कई वैज्ञानिक कारण गिनाते हैं। एक यह कि गंगा जल में बैट्रिया फोस नामक एक बैक्टीरिया पाया गया है, जो पानी के अंदर रासायनिक क्रियाओं से उत्पन्न होने वाले अवांछनीय पदार्थों को खाता रहता है। इससे जल की शुद्धता बनी रहती है। दूसरा गंगा के पानी में गंधक की प्रचुर मात्रा मौजूद रहती है, इसलिए भी यह खराब नहीं होता।

गंगा जल में है गंदगी साफ करने की 20 गुना अधिक क्षमता

शोध बताते हैं कि गंगा नदी की दूसरी नदियों के मुकाबले गंदगी को हजम करने की क्षमता पंद्रह से बीस गुना अधिक है, जहां अन्य नदियों में पानी की गंदगी 15-20 किलोमीटर के बाद साफ होती है, वहीं गंगा नदी एक किलोमीटर के बहाव में उस गंदगी को साफ करने की क्षमता रखती है। कुल शोध का निष्कर्ष रहा कि गंगा के पानी में बीमारी पैदा करने वाले जीवाणुओं को मार देने की क्षमता है, यह अनुसंधान भविष्‍य के लिए इस आशा को भी जागृत करने वाला रहा है कि यदि गंगा के पानी से इस चमत्कारिक तत्व को अलग कर लिया जाए तो बीमारी पैदा करने वाले उन जीवाणुओं को नियंत्रित किया जा सकता है, जिन पर अब एंटीबायोटिक दवाओं का असर नहीं होता है। इस पर अभी वैज्ञानिक काम कर रहे हैं।

गंगा करती है 2,510 किलोमीटर का सफर तय

दरअसल, गंगा उत्तराखंड के गोमुख हिमनद के निकट गंगोत्री ग्लेशियर से निकलती है और लगभग 2,510 किलोमीटर का सफर तय करती है और बांग्लादेश में प्रवेश करती है, यहां गंगा को पद्मा कहा जाता है। गंगा नदी पश्चिम बंगाल मे विश्व प्रसिद्ध सुंदरवन का डेल्टा का निर्माण करती है। कहना होगा कि आज के दिन धरती पर गंगा को लाने के लिए आगे भी ऐसे ही ऋषि भागीरथ को पीढ़ियां याद करती रहेंगी। 

(इनपुट-हिन्‍दुस्‍थान समाचार एवं प्रसार भारती)