बाळक – चौथमल प्रजापति

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बाळक

पैदा होतांईं ना रोयो तो कांईं बाळक ।
नजर ठहर तांईं ना मळक्यो तो कांईं बाळक।।

पेट की बळ सरकबो घणो रुफाळो लागै छै।
रोटी खातां थाळी न खांची तो कांईं बाळक।।

अठी को सूरज अठी उगर आंथ्यां थो बी न मनै।
बना ल्यां बाळ हट छोड्यो तो कांईं बाळक।।

अगर खेलती बगत कोई बी चीज नजर आगी।
वा मूंड़ा मं गळ गप्प न करी तो कांईं बाळक।।

फांणी को भर्यो बरतन सा’मै नजर आग्यो हो।
ऊं बगत व्हां थप थप ना कर्यो तो कांईं बाळक।।

पेळा पोतड़ा की बातां भूलग्या चोथमला ।
बाळक भोळक मं न परण्यो तो कांईं बाळक।।

                             चौथमल प्रजापति 
                             ८२७८६१२५२५