बळ रै रांड दूरै बळजा

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खार कचकची याकोराना
छाती प डकरारी ।
थमबा को नांव न लेरी दन दूणी बदती जारी।।
बैठ घरां मं लोग दबकर्यो,
थोबी भोभळ बळ खारी।
ज्यान झूंकरीछै‌ सरकरां,
जक लेबा ना च्छारी ।।
दन रात खड़ा छै नरस डांगडर बण कअवतारी।
खार………………..!

बुखार बण्यां इटली स्पेन गया,
ऊं बद्या की बग्यां ना उडरी।
भारत बद्या पड़री भारी।
दन रात या सेवा कर री
इण्डिया डांगडरी क आगै
देरआंगळा म्हूं की खारी ।
खार……….!

म्हीनो देख जेठ को थू तो,
आकासा हरणी ना दिखै।
जेठ असाडू पड़्यांडूमड़ा,
जातेडो ई जातो दिखै ।।
बळ रै रांड दूरै बळजा,
सारी दुनिया दुख पारी।
खार…….!

घणा न थोड़ा दन की बातां
बैठ घरां मं ल्यो साता ।
भागू भागू करती देखो,
पड़बाळी छै ईं’क लातां।।
भारत को बळधारी मोदी
दसा मला देगो थारी।।
खार….।

बसवासां पदुनियां टकरी,
बचबा का छै ना आसार।
सीमा सारी आज टूटगी,
बैठया देखोमनड़ो मार।।
लोकडावन सूं ईं बचरीछै देख दुनियां सारी ।
खार…।

आजअसी दुखद घड़ीसूं
मलै कस्यांअब छूटकारो।
तनसूं मंनसूं धनसूं आजा,
सांई देज्याआर उभारो।।
म्हाकाळ उज्जेण बासी खुस्यां को संख पूरज्या भारी।
हाथ खड़ा कर कोराना पगां मं पड़बा जारी।।

चौथमल प्रजापती
8278612525