मूर्तियों में जान डाल रहें है झांसी के युवा कलाकार अरविंद प्रजापति

मैं मेरी कला को बड़े लेवल पर ले जाना चाहता हूँ। मैं ज्यादा से ज्यादा लोगों को खुश कर सकूं तथा कला के क्षेत्र में देश और समाज का नाम रौशन कर सकूं - अरविंद प्रजापति

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प्रजापति मंथन : झांसी / उत्तरप्रदेश। प्रजापति कुम्हार समाज के कलाकारों की कलाकारी की जितनी तारीफ की जाए उतनी ही कम है। आज प्रजापति समाज के युवा हर क्षेत्र में अपने कदम बढ़ा रहें और उच्च मुकाम भी हासिल कर रहें है।

बात जब कला की आती है तो प्रजापति समाज प्राचीन काल से ही सिद्धहस्त रहा है। आज भी अपनी कला के दम पर अपनी पहचान के साथ कायम है। आज हम कला के क्षेत्र में नये आयाम गढ़ रही एक ऐसी ही प्रतिभा से आपका परिचय करवाने जा रहें है। इस प्रतिभा का नाम है अरविन्द प्रजापति। जो मूर्तिकला के क्षेत्र में अपनी अलग पहचान बना चुके है।

अरविंद प्रजापति एक ऐसे युवा कलाकार बनकर उभरे है जिन्होंने समाज की हजारों साल पुरानी कला में फिर से प्राण फूंक दिये है। इनके द्वारा बनाई गई मूर्तियां लोगों के दिलों पर अपनी एक अलग छाप छोड़ रही है। जहां एक और समाज के युवा कला को छोड़कर दुसरे क्षेत्रों में अपना केरियर बनाने में लगे हुए है वहीं अरविंद प्रजापति ने अपनी कला को ही अपना केरियर बना लिया है। इनकी मेहनत और लगन का ही परिणाम है कि वे अपने लिए अलग मुकाम बना चुके है।

अरविन्द प्रजापति का जीवन परिचय

अरविंद प्रजापति का जन्म उत्तरप्रदेश के झांसी के निकट पिछौर कस्बे में लालाराम प्रजापति के यहाँ २१ जनवरी १९९४ को हुआ। इनकी माता का नाम श्रीमती कुसुम प्रजापति है। इनके पिता लालाराम प्रजापति भी कलाकार है। बचपन से ही पिता को कार्य करते हुए देखकर इनके मन में भी कला के प्रति लगाव बढ़ता गया। और उसी लगाव ने इन्हें कलाकार बना दिया। अरविंद प्रजापति बताते है कि वे पिछले 8 वर्षो से इस कार्य में है।

अरविंद प्रजापति ने इन्द्रा कला संगीत विश्वविद्यालय खैरागढ़ से २०१७ में बी.एफ.ए. तथा २०१९ में एम.एफ.ए. किया। इसी दौरान इन्हें सी.सी.आर.टी. दिल्ली के द्वारा 2019 में नेशनल स्कालरशीप भी मिली।

अरविंद प्रजापति वर्ष 2014 से ही खैरागढ़ महोत्सव के एक्जीबिशन में सम्मिलित आए है। ये २०१६ में झांसी में तथा २०१७ और २०१९ में भोपाल के एक्जीबिशन में भी सम्मिलित हो चुके है। इन्हें वर्ष 2019 में ऑल इण्डिया ऑनलाईन आर्ट कॉम्पीटिशन में द्वितीय स्थान प्राप्त हुआ। २०१९ में ही इन्हें बुंदेलखण्ड आर्ट सोसायटी झांसी के द्वारा भी सम्मानित किया जा चुका है।

अरविंद प्रजापति बताते है कि वे मिट्टी के साथ-साथ लकड़ी, स्टोन (पत्थर), फाइबरग्लास, आईरन (लोहा) तथा पीओपी आदि के साथ कार्य करते है। कई बार मिक्स मटेरियल का भी प्रयोग करते है। अरविंद प्रजापति कलाकार के साथ-साथ कार्मशियल रूप से भी कार्य कर रहें है।

अरविंद प्रजापति ने बताया कि उनका लक्ष्य कला के क्षेत्र में और आगे बढऩा है। एक कलाकार के रूप में देश तथा विदेशों में प्रजापति समाज का नाम रौशन करना है। कला का क्षैत्र बहुत बढ़ा है। इसमें जितना काम किया जाए उतना ही कम है। मैं एक कलाकार के रूप में निरतंर मेहनत कर रहा हँू। मै लोगों के दिलों में जगह बना पाऊँ, यही मेरी ख्वाइश है।

युवाओं के लिए आदर्श है अरविंद प्रजापति

प्रजापति (कुम्हार) एक हजरों साल पहले भी एक कलाकार था और आज भी है। उन्ही में एक हमारे झांसी निवासी युवा कलाकार अरविंद प्रजापति जी है, जिन्होंने अपनी कला का जबरदस्त प्रदर्शन किया है। ऐसे कलाकार पर समाज को गर्व है। – विनोद कुमार प्रजापति, भेल झांसी

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