अकेलो पड़ग्यो – चौथमल प्रजापति

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अकेलो पड़ग्यो

अस्या कस्या दर्याव मं पड़ग्यो म्हूं।
अपणा पण मं छोखो फसग्यो म्हूं ।।

मूडा की मुळकण फीकी पड़गी ।
चाचण पोचण मं ही थकग्यो म्हूं।।

खाबा पीबा की कमी ना रखी ।
जुट जुड़्यां प ऄकलो पड़ग्यो म्हू ।।

आगा सारी मं रह छो सबकै।
अब तो पूंछड़ा प पूंछग्यो म्हूं।

अस्यो बदलाव तो खदी न देख्यो ।
अध गाबा मं आकै रहग्यो म्हूं।।

गार होग्यो छो तो बी न पगळ्या वै ।
अपणै आप सूं ही डरग्यो म्हू।।

सम्ये भागतो जार्यो चौथमला।
पग फांक्या पण पाछै रहग्यो म्हूं।

चौथमल प्रजापति, केशवपुरा, कोटा (राज)